🐦 लालची दादा और सोने की चिड़िया । Greedy Grandfather and the Golden Bird
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| लालची दादा और सोने की चिड़िया । kids Hindi Moral Story |
बहुत समय पहले की बात है। भारत के एक छोटे से गाँव में एक बूढ़े दादा रहते थे। उनका नाम भोलाराम था। भोलाराम बहुत गरीब थे, लेकिन उनके अंदर एक बहुत बड़ी बीमारी थी – लालच।
इस कहानी में हम सीखेंगे कि लालच करने से आदमी का क्या बुरा हाल होता है। तो चलिए, शुरू करते हैं ये दिलचस्प कहानी।
भाग 1 – गरीब दादा और उनकी मुश्किलें
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| लालची दादा और सोने की चिड़िया । kids Hindi Moral Story |
भोलाराम अकेले रहते थे। उनकी पत्नी का कई साल पहले देहांत हो चुका था। उनके दो बेटे थे, जो बड़े होकर शहर चले गए थे। वो कभी-कभार अपने पिता से मिलने आते थे, लेकिन पैसे देने में हाथ सिकोड़ते थे।
भोलाराम के पास एक छोटी सी झोपड़ी थी। उसमें छत टपकती थी, दीवारें फटी हुई थीं। लेकिन दादा के पास कोई और सहारा नहीं था। वो दूसरे लोगों के खेतों में मजदूरी करते थे। जो थोड़ा-बहुत पैसा मिलता, उसी से अपना गुजर-बसर करते थे।
एक दिन की बात है। दादा खेतों में काम कर रहे थे। तभी उनकी नज़र एक खूबसूरत चिड़िया पर पड़ी।
भाग 2 – सोने की चिड़िया का आगमन
वो चिड़िया बिल्कुल अलग थी। उसके पंख सोने की तरह चमक रहे थे। वो बिल्कुल सुनहरे रंग की थी। दादा ने ऐसी चिड़िया जिंदगी में कभी नहीं देखी थी।
दादा सोचने लगे – "ये चिड़िया तो असली सोने जैसी लगती है। अगर मैंने इसे पकड़ लिया, तो मैं अमीर बन जाऊंगा। मुझे कभी मजदूरी नहीं करनी पड़ेगी।"
लेकिन चिड़िया बहुत फुर्तीली थी। जैसे ही दादा उसके पास जाते, वो उड़ जाती। दादा थक गए, लेकिन उनका लालच कम नहीं हुआ। उन्होंने सोचा – "कल फिर कोशिश करूंगा। ये चिड़िया मेरी ही होगी।"
भाग 3 – चिड़िया पकड़ी गई

लालची दादा और सोने की चिड़िया । kids Hindi Moral Story
अगले दिन दादा जल्दी उठ गए। वो एक जाल लेकर आए। उन्होंने खेत में कुछ दाने बिखेर दिए और छुपकर इंतजार करने लगे।
कुछ देर बाद, वही सुनहरी चिड़िया वहां आई। उसने दाने चुगने शुरू कर दिए।
तभी दादा ने झपट्टा मारा और चिड़िया को जाल में फंसा लिया।
दादा बहुत खुश थे। वो बोले – "आखिरकार मैं जीत गया। अब मैं इस चिड़िया को ले जाऊंगा और बाजार में बेच दूंगा। लाखों रुपये मिलेंगे!"
लेकिन अचानक चिड़िया बोल पड़ी।
भाग 4 – चिड़िया की बात
चिड़िया ने धीमी आवाज़ में कहा – "दादा जी, मुझे जाने दो। मैं आपको वादा करती हूँ कि मैं रोज़ आपके पास आकर एक सोने का अंडा दूंगी। लेकिन एक शर्त पर – आप कभी लालच नहीं करोगे।"
दादा चौंक गए। उन्होंने कभी सोचा नहीं था कि चिड़िया बोल सकती है।
दादा का दिमाग तेजी से काम करने लगा। उन्होंने सोचा – "एक सोने का अंडा रोज़? यानी महीने में 30 अंडे? ये तो अमीर बनने का सुनहरा मौका है!"
उन्होंने चिड़िया से कहा – "ठीक है मैं तुम्हें जाने देता हूँ। लेकिन वादा याद रखना। रोज़ एक अंडा देना।"
चिड़िया ने सिर हिलाया और उड़ गई।
भाग 5 – खुशहाल दिन

लालची दादा और सोने की चिड़िया । kids Hindi Moral Story
अगले दिन सुबह, चिड़िया सच में आई। उसने दादा के सामने एक चमकता हुआ सोने का अंडा रखा।
दादा के होश उड़ गए। असली सोना था वो अंडा!
दादा अंडा लेकर शहर गए। उसे बेचकर उन्हें बहुत सारे पैसे मिले। अब दादा रोज़ एक अंडा बेचते थे। धीरे-धीरे वे अमीर होने लगे।
उन्होंने अपनी झोपड़ी गिरवाकर एक अच्छा सा पक्का मकान बनवाया। नए कपड़े खरीदे। अच्छा खाना खाने लगे। गाँव के लोग देखते रह गए – "भोलाराम इतना अमीर कैसे हो गया?"
लेकिन दादा किसी को कुछ नहीं बताते थे।
भाग 6 – लालच जाग उठा
एक दिन दादा बैठे सोचने लगे – "ये चिड़िया रोज़ सिर्फ एक अंडा देती है। अगर मैंने इसे पकड़ लिया, तो एक साथ सारे अंडे निकाल सकता हूँ। उसमें तो कम से कम 100 सोने के अंडे होंगे। फिर तो मैं करोड़पति बन जाऊंगा!"
लालच दादा के दिल में गहरे उतर चुका था। उन्होंने सोचा – "चलो मैं कल ही चिड़िया को पकड़ लेता हूँ और उसका पेट चीरकर सारे अंडे निकाल लेता हूँ।"
उन्होंने ये नहीं सोचा कि चिड़िया ने उनका कितना भला किया था।
भाग 7 – बड़ी गलती
अगली सुबह, चिड़िया हमेशा की तरह आई। वो एक और सोने का अंडा लेकर आई थी।
लेकिन इस बार दादा ने जाल तैयार रखा था। चिड़िया जैसे ही अंडा रखने लगी, दादा ने झट से जाल फेंक दिया।
चिड़िया फंस गई। वो बोली – "दादा जी, ये क्या कर रहे हो? मैं तो तुम्हारा भला कर रही थी।"
दादा बोले – "चुप रह। आज मैं तुम्हारे पेट से सारे अंडे निकालूंगा।"
चिड़िया ने समझाने की कोशिश की – "दादा जी, मेरे पेट में एक भी अंडा नहीं है। मैं जादुई हूँ, मैं हर रोज़ एक अंडा बना सकती हूँ। लेकिन अगर तुमने मुझे मार दिया, तो कभी अंडा नहीं मिलेगा।"
लेकिन लालच में दादा को कुछ सुनाई नहीं दिया।
भाग 8 – अंत (जो बदल गया सबकुछ)

लालची दादा और सोने की चिड़िया । kids Hindi Moral Story
दादा ने एक तेज चाकू उठाया और चिड़िया का पेट चीर दिया।
लेकिन अंदर कोई अंडा नहीं था। सिर्फ खून और मांस था। वो सुनहरी चिड़िया मर चुकी थी।
दादा के पैरों तले जमीन खिसक गई। वो रोने लगे – "मैंने क्या कर दिया? मेरी लालच ने मुझे अंधा बना दिया।"
अब उनके पास न सोने के अंडे थे, न वो चिड़िया। और जो पैसे थे, वो भी धीरे-धीरे खत्म होने लगे।
दादा फिर से वैसे ही गरीब हो गए जैसे पहले थे। उनका बड़ा मकान अब खाली था। लोग उनकी हंसी उड़ाते थे – "देखो लालची भोलाराम का क्या हाल हो गया।"
दादा ने अपनी गलती मानी लेकिन अब कुछ नहीं हो सकता था।
सीख (Moral of the Story)
"लालच बुरी बला है। जो लालच करता है, वह अंत में सब कुछ खो देता है। जो थोड़े में संतुष्ट रहता है, वही सुखी रहता है।"


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